Sat 18 Apr 2026

🎤 KKC Talent Show

Auditions Now Open — Register Here

ब्रेकिंग

आप भी अपनी आवाज़ उठाएं और ख़ुशी का गीत गाएं।

E-Paper अगस्त 2025

डॉक्टरों ने गाए गीत, थामा माइक, गिटार और सेक्सोफोन से लेकर कांगो-बोंगो तक

E-Paper जून 2025

E-Paper मई 2025

: आरंभ चैरिटेबल फाउंडेशन की विविधरंगी काव्य गोष्ठी संपन्न

admin

admin

Sat, May 6, 2023
आरंभ चैरिटेबल फाउंडेशन की विविधरंगी काव्य गोष्ठी संपन्न

भोपाल : आरंभ चैरिटेबल फाउंडेशन साहित्यिक संस्था की गत दिवस "विविध रंगी आरंभ काव्य गोष्ठी" 9 मसाला रेस्टोरेंट, भोपाल हाट में गरिमामय माहौल में संपन्न हुई, जिसमें रचनाकारों ने अपनी विभिन्न विषयों पर प्रेरक रचनाओं से खूब वाहवाही बटोरी।

हृदय को संवेदना की कसौटी पर कसेंगी
कुछ रहे न रहे कविताएंँ रहेंगी।
भागते हुए वक़्त की चरितावली
संघर्ष की व्यथा - कथा
विकास की विरुदावली
कभी शांँति की संहिता रचेंगी
कुछ रहे न रहे कविताएंँ रहेंगी।

इसी तरह की रचनाओं, कविताओं की खुशबू से महकता रहा परिवेश।
कवयित्री निरूपमा खरे ने पढ़ा -
ये नाखुश औरतें,
चीखती- चिल्लाती, रार करती
खुद से भी बेजार औरतें।
साहित्यकार उषा सोनी ने पढ़ा -
घर- घर में उत्सव की छाई उमंग है,
द्वार - द्वार ऑंगन में बज रहे मृदंग हैं।
वरिष्ठ कवयित्री शेफालिका श्रीवास्तव ने अपनी रचना से श्रोताओं का मन मोह लिया -
मुट्ठी में वर्तमान है, मन में अतीत है,
अधरों पर कांँपता जीवन संगीत है।
इसी क्रम में शोभा ठाकुर ने भी अपनी प्रेरक रचना से दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी -
बेटा हो या बेटी हो तुम,
सुदृढ़ स्तंभ हो जीवन आधार के !
कर्म के रथ पर सजे,
उन्नति के शीर्ष तक पहुंचे हो तुम।

कार्यक्रम का संचालन कर रही बिन्दु त्रिपाठी ने पढ़ा -
मै सफलता के शिखर पर खड़ी मुस्कुराऊंँगी,
और तुम हाथ मलते रह जाओगे।
मै छू लूंँगी आसमा की बुलंदी, तुम देखते रह जाओगे ।
कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि मनी सक्सेना ने कहा -
समय बदलता है,
दे जाता है गौरव गाथा ,
कुछ सीख ,
यही है मानव की दरकार ।

विशिष्ट अतिथि डाॅ रेखा भटनागर ने कहा -
रंग और रेखाएँ रह जाएंँगी,
स्मृतियाँ शेष रह जाएंँगी ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही आरंभ फाउंडेशन की अध्यक्ष अनुपमा अनुश्री ने अपने प्रेरक उद्बोधन में साहित्य में आई विसंगतियों की ओर इंगित किया - मंचों पर पढ़ी जा रही अश्लील कविताओं पर कटाक्ष करते हुए लेखन के कमजोर स्तर पर चिंता जाहिर की और कहा कि साहित्य का स्तर उन्नत होना चाहिए।झूठी लोकप्रियता के फेर में साहित्य का स्तर गिरना नहीं चाहिए। उत्कृष्ट, प्रांजल भाषा, संवेदनाओं व काव्य तत्वों के बिना कविता अधूरी है। प्रकाशित तो हो सकती है, जोर- शोर से पढ़ी जा सकती है लेकिन ह्रदय को प्रकाशित नहीं कर सकती।
कार्यक्रम का सफल संचालन बिन्दु त्रिपाठी ने किया । इस अवसर पर साहित्यप्रेमियों ने कविताओं का रसास्वादन किया ।

Tags: