: ना पर हाँ की विजय का उत्सव होली - मन कमलहन्स
होली याने जो चीज हो ली वैसी हो ना सकेगी अलौकिक अद्भुत रंगीन धुन्ध रंगों की ! होली जैसा कोई दूसरा त्यौहार इस वसुंधरा पर ढूंढने से भी ना मिलेगा ! रंग है गुलाल है आनंद है, उत्सव है खो जाने का सब कुछ पाने का मदहोशी का तल्लीनता का मस्ती का नाच गाने का मृदङ्ग बजाने का ,ये नाच का सतरंगी इंद्रधनुषी त्योहार है,हँसी के फव्वारों का उल्लास के ठुमको का महत्योहार है ये अन्य सारे बड़े से बड़े उत्सव भी उदास से हैं इस रसभरे रँगभरे महोत्सव के सामने !होली की तो बात ही निराली है हर पल नृत्य उल्लास खुशियों वाला दूसरा त्यौहार सम्पूर्ण पृथ्वी पर नहीं है ,ये त्योहार सबसे बड़ी विजय है नास्तिकता पर आस्तिकता की यानी आनंद की कोई भी त्योहार गमों से नहीं होता है अपितु गम भुलाने के लिए होता है होली इसका उत्तम प्रतीक है सम्पूर्ण नृत्य उत्सव ना पर हाँ की विजय का उत्सव, सृजन का उत्सव ,महाशक्तिशाली असुर पर मासूम कोमल बालक की आस्था की जीत का उत्सव क्या खूब रंगों भरा उत्सव ! मन का तो ये मानना है कि हम सब सिर्फ़ नाचते गाते प्रभु के द्वार तक जाएंगे जरा गौर से देखो ईश्वर ने कितना रंग सजाया है हर जगह फूलों में ,इंद्रधनुषों में, हरयाली में ,पक्षियों में, तितलियों में हम सब तो बेरंग है इसके सामने ?? सारी सृष्टि में यही होली का सार है, मनाओ इस उत्सव को और रंगीन हो जाओ अपने सारे रंग गीले करके बन जाओ रंगीला मनमस्त मनमित्र
मन कमलहन्स - इंदौर
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