: साथ देती है औरत - सपना सी.पी.साहू 'स्वप्निल'
देखों चिंता न करना, तुम्हारे साथ मैं हूं ना
जब तक मैं हूं, तुम हर चिंता से मुक्त रहना
मैं हूं औरत, प्यार की दौलत
सिर्फ लुटाती बदले में कुछ नहीं चाहती
देखों मैं मां हूं…
बच्चों के लिए सब दर्द सहती,
फिर भी ममता, स्नेह देती
मैं उनकी भूख-प्यास समझती
पढ़ाई लिखाई में प्रोत्साहित करती
उनकी गलतियों पर लताड़,
तो उनके लिए आंचल की छांव भी
मैं बच्चों को अच्छे-बुरे का फर्क समझाने वाली…
देखों चिंता न करना, मां बनकर साथ हूं ना
देखों मैं बहन हूं…
भाई से होने वाली प्यार भरी तकरार
उसका हित चाहने वाली सलाहकार
गैरों से भाई को बचाने के लिए ढाल
मैं भाई के लिए सदा ही मदद
उसके लिए स्नेह का रक्षाबंधन
उसकी विजय के लिए ललाट पर तिलक
मैं उससे मिले तोहफों के बदले, डाँट से बचाव…
देखों चिंता न करना, बहन बनकर साथ हूं ना।
देखों मैं पत्नी हूं…
पति के कंधे से कंधा मिलाकर चलती
उसकी तकलीफों में दोस्त बनती
पति से जुड़े हर रिश्ते का ख्याल रखती
उसकी पसंद, नापसंद से चलती
पति के लिए सजती-सँवरती
उसकी सुखद जिदंगी के लिए व्रत रखती
मैं पति के दिए मकान को सुंदर घर करती…
देखों चिंता न करना, पत्नी बनकर साथ हूं ना
देखों मैं बेटी हूं…
हर पल भोला सा दुलार देती
पिता के सम्मान की चिन्ता करती
नई-नई फरमाईश भले ही करती
पर अपने जीवन का नायक पिता को कहती
हर दम पापा का नाम रोशन करना चाहती
पिता की उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश
मैं, मां से ज्यादा पिता की फिक्र करती…
देखों चिंता न करना, बेटी बनकर साथ हूं ना
देखों इसके अलावा भी कई रिश्तें
दादी, ताई, चाची, नानी, मौसी, मामी
तो कभी मित्र बनकर निभाती हूं
मैं औरत ही आदमी को पूर्ण करती हूं
मैं उसके लिए यश-कीर्ति-वैभव प्रार्थना
समृद्धि और दीर्घायु की कामना भी हूं
मैं सदा मांगती, पुरुष की खुशियों के लिए
मैं अपने सब रिश्ते सत्यनिष्ठा से निभाती हूं
देखों चिंता न करना, हितैषी बनकर साथ हूं ना
सपना सी.पी.साहू 'स्वप्निल'
इंदौर (म.प्र.)

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