: होली के रंगों के साथ में हो गए हम निहाल - के.पी.एस.चौहान 'आरज़ू'
खुशियां मनाना सीखो
होली के त्योहार से
झूका दिया, सर हमने दुश्मन का
,स्नेह और प्यार से,
हमने वार किया है रंगों की फूहार से
जो झुक नहीं सकता था,
तीर और तलवार से,
वह झुक गया है सामने हमारे फूलों के हार से,
पूरे बदन में, तन और मन, में चढ़ा हुआ है होली का रंग
अब हमें क्या मतलब है 16 शृंगार से,
होली के रंगों के साथ में हो गए हम निहाल,
हर दुश्मन पर विजय पाई है हमने
बिना तलवार बिना ढाल,
इंसान और इंसानियत का बस एक ही मतलब समझ में आया,
दुनिया में सबसे बड़ा है यह हथियार,
जिसका नाम है स्नेह और प्यार,
दुनिया में बस प्यार की एक बोली है,
दुश्मनी भुलाकर सबको लगाओ गले
बुरा ना मानो होली है,
बड़ा ही छैल छबीला और नटखट है काना,
और राधा बड़ी है भोली
सब सखियां मिलकर लगाओ रंग अबीर, गुलाल, खूब खेलो होली
कह दो माखनचोर से बरसाना में अगर आए तो "लट्ठ" पड़ेगी चारों ओर से,
मार-मार कर करदेंगें पूरा लाल,
पहचान नहीं पाओगे अपने आप को
के अबीर लगा है या गुलाल,
अब मत समझ लेना के, सुदामा जैसी है ,यह गोपियां भी भोली,
दुनिया में बस हे "प्यार" की एक ही बोली
जिसने रंग लिया अपने आप को "श्याम" रंग में,
गुरुदेव के लिए समर्पित
आशुकवि-शिक्षक-लायन"
के.पी.एस.चौहान"आरज़ू"
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