Sun 19 Apr 2026

🎤 KKC Talent Show

Auditions Now Open — Register Here

ब्रेकिंग

आप भी अपनी आवाज़ उठाएं और ख़ुशी का गीत गाएं।

E-Paper अगस्त 2025

डॉक्टरों ने गाए गीत, थामा माइक, गिटार और सेक्सोफोन से लेकर कांगो-बोंगो तक

E-Paper जून 2025

E-Paper मई 2025

: इंदौर पत्रकारिता जगत के पितामह पद्‍मश्री नईदुनिया के अभय छजलानी का निधन

इंदौर पत्रकारिता जगत के पितामह पद्‍मश्री नईदुनिया के अभय छजलानी का निधन

इंदौर : 1955 में पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रवेश किया। 1963 में कार्यकारी संपादक का कार्यभार संभाला बाद में लंबे अरसे तक नईदुनिया के प्रधान संपादक भी रहे। वर्ष 1965 में उन्होंने पत्रकारिता के विश्व प्रमुख संस्थान थॉम्सन फाउंडेशन, कार्डिफ (यूके) से स्नातक की उपाधि ली। हिन्दी पत्रकारिता के क्षेत्र से इस प्रशिक्षण के लिए चुने जाने वाले वे पहले पत्रकार थे, पत्रकारिता जगत के पितामह कहलाने वाले पूर्व मे नईदुनिया Naiduniya के प्रधान संपादक पद्‍मश्री अभय जी छजलानी Abhay Chhajlaani विगत कई समय से लंबी बीमारी से ग्रसित थे आज सुबह उनका निधन हो गया है, 4 अगस्त 1934 को इंदौर मे हुआ था, पिता बाबू लाभचन्द छ्जलानी के सानिध्य मे साहित्य जगत को सीखने का अवसर प्राप्त हुआ, बचपन से ही लेखन के क्षेत्र मे आगे बढ्ने का संकल्प उन्हे शिखर तक पहुंचाने मे सार्थक साबित हुआ। आज शाम 5 बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

एक छोटी सी तंग गली से प्रारम्भ हुआ अखबार पत्रकारिता की यूनिवर्सिटी कहलाने वाला अखबार नईदुनिया इंदौर ही नहीं अपितु देश मे भी अपनी ख्याति बना चुका था और ये सब अभय जी की लेखनी ने कर दिखाया था, उनका शुरू से ही लक्ष्य रहा था की हर अच्छे कारी को सहयोग करने मे उनका योगदान सर्वप्रथम रहता था, फिर चाहे वह नर्मदा नदी को इंदौर तक लाने मे भागीरथी की भूमिका हो या फिर खेल को आगे बढ़ाने मे हो या एक विश्वसनीय अखबार की पाठक शृंखला हो, हर कोई उनकी लेखनी का दीवाना था, अखबार के कर्मचारियों को उन्होने सदैव परिवार का दर्जा दिया, कर्मचारी की पीढ़ी दर पीढ़ी नईदुनिया मे कार्य करती रही उन्होने नईदुनिया को पाठको के दिलो मे स्थान दिलवाया, शासन प्रशासन हो या फिर विध्यार्थी हर कोई नईदुनिया का दीवाना बना।

नईदुनिया से ही मेरी पत्रकारिता को पंख लगे थे, अभय जी ने ही सिखाया था की किस प्रकार से आलेख और समाचार तैयार किए जाते है, आज बहुत स्तब्ध हूँ उनके निधन के समाचार को लिखते हुए, बहुत कम ऐसे संपादक अथवा पत्रकारिता के पितामह होते है जो दूसरों को आगे बढ़ाने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते थे, पत्रकारिता जगत के इस नायाब हीरे को आज अपने बीच नहीं पाकर उनके ना होने का एहसास आँखों को नाम कर देता है, ईश्वर से यही विनय है की उन्हे आओने श्रीचरणों मे स्थान प्रदान करें, नईदुनिया के पितामह अभय जी छजलानी का निधन होने पर संगीत सेवा सहारा परिवार उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

दीपक पाठक - संपादक

Tags: