: बेटी की पुकार - डॉ रेखा दशोरा
admin
Tue, Mar 7, 2023
युग बीता पर उसमें अब तक ,
आई नहीं दरार है ,
बेटा और बेटी के बीच ,
भेदभाव की दीवार है।
सामाजिक सोंच और विषमताएं
दिन रात उसे पोषित करती हैं ,
असमानता का जहर जडों को ,
गति लिए पक्का करती हैं ।
क्षमताओं और भावनाओं के ,
साक्ष्य बेटी जब देने जाती है,
हर बार ही निष्फल रहती है ,
हर बार आघात ही खाती है ।
संपत्ति हो या शिक्षा ,
भेद सदा है बरता जाता,
स्त्री कोख से जन्म लेकर भी ,
पुरुष ही बन जाता है विधाता।
कितने ही कानून बना दो ,
विकास हेतु चाहे करो प्रचार ,
मानसिकता में बदलाव बिना ,
नारी को नहीं मिलेंगे अधिकार।
परिवर्तन तो लाना होगा ,
घर घर अलख जगाना होगा ,
विश्व गुरु बनने के लिए ,
आंगन को समतल बनाना होगा।
डॉ रेखा दशोरा
Tags: