: मेरे मन मंदिर रहे माँ - हरिदास बड़ोदे
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Sat, May 6, 2023
मेरे मन मंदिर रहे माँ, मेरी प्यारी जान है।
तेरे चरणों में है जन्नत, तू मेरी पहचान है।
मेरे मन मंदिर रहे माँ..।।
पूज्य प्रथम माता-पिता, और गुरु मेरी शान है।
तेरे तन का मैं हूं कण, एक तू ही मेरा प्राण है।
तेरे बिन एक पल ना रहूं, तू ही मेरा सम्मान है।
मेरी जान कुर्बान तुझपर, तू मेरा अभिमान है।
मेरे मन मंदिर रहे माँ..।।
सबसे सुंदर है मेरी मैया, तेरे मीठे-मीठे बोल है।
सोना सा दिल तेरा माँ, सोने से भी अनमोल है।
लाड़ प्यार से तूने पाला, रोशन नाम मेरा किया।
मैने पाया नवजीवन, तूने जन्म मेरा धन्य किया।
मेरे मन मंदिर रहे माँ..।।
ममता मुझपर बनाए रखना, मैया तेरी संतान हूं।
तेरे दिल का मैं हूं टुकड़ा, मैं जो थोड़ा नादान हूं।
कई कष्ट दर्द लेकर मैया, हरपल मुझे संवारा है।
जब भी रहा परेशान मैंने, दिल से तुझे पुकारा है।
मेरे मन मंदिर रहे माँ..।।
तेरे खातिर पढ़े मरना तो, मैं भी मर मिट जाऊंगा।
मेरे बिन छलके आंसू तो, फौरन वापस आऊंगा।
तेरी राहों के कांटों को मैया, पलको से उठाऊंगा।
तेरे खून पसीने का भी, अब फर्ज मैं निभाऊंगा।
मेरे मन मंदिर रहे माँ..।।
तेरी शक्ति का हूं पूंज, मेरी विनती तू स्वीकार कर।
तेरे साया में रहूं सदा, तू मुझपर यह उपकार कर।
तेरी शक्ति मेरी भक्ति का, सारा जहां गुणगान करे।
तुझसे लूंगा हर जन्म, तू प्रार्थना मेरी स्वीकार करे।
मेरे मन मंदिर रहे माँ..।।
खुदा अगर तुझे कहे, तो हाजिर मैं हो जाऊंगा।
तेरे दूध का कर्ज कैसे, इस जन्म में चुकाऊंगा।
नाम दिया जो तूने हरि, मैं 'हरिप्रेम' नमन करूं।
तेरे चरणों में सदा रहूं, कोटि-कोटि प्रणाम करूं।
मेरे मन मंदिर रहे माँ..।।

हरिदास बड़ोदे 'हरिप्रेम', बैतूल (मध्यप्रदेश)
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