: सब के संग कान्हा रास रचाये-खेले होली रे - अनिल गुप्ता ग्वालियरी
admin
Tue, Mar 7, 2023
सब के संग कान्हा रास रचाये
सब के संग खेले होली रे
श्याम ने ऐसो रंग लगायो
श्याम ने ऐसो रंग चढा़यो
श्याम रंग में यो रंग गई राधा
राधा ना रही गोरी रे
मोर-मुकुट, कमर मुरलिया
श्याम हाथ पिचकारी रे
तोड़ के, माखन लूटे
मन मोहन-गिरधारी रे
मन को भाये
श्री कृष्ण की लीला
उनकी माखन चोरी रे
श्याम ने ऐसो रंग चढा़यो--
नटखट-माखन चोर की बातें
मधुर मनोहर लागे रे
मधुर-मनोहर बंसी धुन सुन
प्रेम सभी उर जागे रे
खिचे जा रहे मन-मोहन से
बंधे प्रेम की डोरी रे
श्याम ने ऐसो रंग चढायो--
रंग लगाये, रास रचाये
माखन चोर मुरारी रे
श्याम-रंग में रंग सब मस्त है गये
सुध-बुध खोये नर-नारी रे
'अनिल'
कृष्ण-प्रेम रंग चढे़ बिना
जीवन-पाती कोरी रे
श्याम ने ऐसो रंग चढायो
गीतकार-अनिल गुप्ता ग्वालियरी

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