: मैं तो बेटी हूं, उसकी परछाई हूं - मीना रवि
मां के चरणों में करती हूं मैं नमन जिसने जन्म दिया और करती रही मेरी सेवा हर पल करती हूं मैं उसको नमन। खुद भूखी रही और करती रही हर पल काम लेकिन मुझको कभी न रखा उसने भूखा।
मैं तो बेटी हूं उसकी परछाई हूं मुझे देखकर वह खुश हो कर जीती रही हर पल, करती हूं मैं नमन।
आज मेरे पिता नहीं रहे हो गई वह अकेली किससे अपनी मन की बातें कहें, बच्चों को ही ढूंढती रहती है उसकी आंखें।

आज किसी के पास उसके लिए समय नहीं रहा, आज तुम सब बच्चें भी अपना फर्ज निभाओ जैसा आज करोगे वैसा ही कल होगा तुम्हारे साथ भी, हमेशा रखना ध्यान।
यही संसार की रीत है तुम सबने भी इसी तरह करनी है सेवा अपने बच्चों की और इंतजार करते रहोगे उनके आने का हर पल, जैसे आज मां करती है इंतजार तुम सबका।
मैंने तो बेटी बनकर अपना फर्ज निभाया मैं तो बेटी हूं उसकी परछाई हूं उसकी सब जिम्मेदारी पूर्ण करने में मैंने उसका हर पल दिया साथ।
मैंने तो निभा दिया फर्ज आज भी करती हूं उसको हर पल याद, मां मेरी है बहुत प्यारी करती हूं मां के चरणों मैं नमन।

मीना रवि, प्रधानाध्यापिका - पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड।
Tags: